पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक अदालत ने झूठी इज़्जत के नाम पर अपनी बेटी उसके प्रेमी और प्रेमी के भाई की ह्त्या करने वाले 10 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है.
ये सज़ा विशेष जज आर बी शर्मा की अदालत में सुनाई गई.
जलेसर थाने के बिलख़तरा ग्राम में अठारह साल की युवती विजया ने घर से भागकर अपने प्रेमी उदय पाल के साथ शादी कर ली थी.
इस घटना से लड़की के परिवार में बहुत नाराज़गी थी.
पिता रमेश पाल ने कुछ दिनों बाद पड़ोस के गाँव में अपनी बेटी और उसके प्रेमी को ढूंढ निकाला.
पुलिस का कहना है कि रमेश पाल और परिवार के अन्य लोग प्रेमी युगल को मारते पीटते घसीटते हुए ले आए और गोली मार दी.
साथ में उदय पाल के भाई की भी ह्त्या कर दी.
पुलिस ने बारह अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. अदालत ने दस लोगों को क्रूर ह्त्या का दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई.
भारत में हर साल सैकड़ों युवक युवतियां जाति या धर्म के बाहर अथवा अपने गोत्र में प्रेम विवाह करने के कारण इस तरह की क्रूर मौत मरते हैं.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि इज़्जत के नाम पर ह्त्या के लए दोषी लोगों को फांसी की सजा देनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की ह्त्या को क्रूर , बर्बर और सामंती बताते हुए इसे खत्म करने की बात कही थी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय निचली अदालतों पर बाध्यकारी होते हैं
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें